कड़कड़ाती ठंड, तेज़ गर्मी या भारी वर्षा, इस बार “ला नीना” का भारत पर क्या प्रभाव रहेगा?

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लंबे समय तक चलने वाले मानसून के बाद भारत में इस साल सर्दी की शुरुवात बहुत जल्दी हुई है, जिसका पहला सबूत 11 अक्टूबर को लद्दाख, जम्मू और कश्मीर क्षेत्रों में शुरुआती बर्फबारी और 25 अक्टूबर को लेह, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ऊंचे इलाकों में भारी बर्फबारी से आया है। हालांकि बर्फबारी इन क्षेत्रों में असामान्य नहीं है लेकिन इस बार बर्फ़बारी की तीव्रता सामान्य से बहुत अधिक थी।
पिछले कुछ हफ्तों में पूरे उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में भी व्यापक वर्षा हुई है। 27 अक्टूबर को, देश भर में सामान्य से 38 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई थी।
अक्टूबर के अंत में उत्तर और उत्तर पश्चिम भारत में सर्दियों की शुरुआत और भारी वर्षा के लिए पश्चिमी विक्षोभ (western disturbance)और बंगाल की खाड़ी से आने वाली पूर्वी हवा को जिम्मेदार ठहराया गया है।
पश्चिमी विक्षोभ (western disturbance)अतिरिक्त उष्णकटिबंधीय तूफान(extratropical storm) हैं जो भूमध्य सागर(Mediterranean sea) के ऊपर उत्पन्न होते हैं और पश्चिमी हवाओं के माध्यम से भारत में आते हैं। पश्चिमी विक्षोभ उत्तर पश्चिम भारत में अधिकांश सर्दियों और पूर्व मानसून वर्षा का कारण हैं। ‘रघु मुरतुगुड्डे’ के अनुसार इस मौसम में भूमध्य सागर सामान्य से अधिक गर्म होता है, इसलिए भूमध्य सागर से आने वाली हवाएं सामान्य परिस्थितियों की तुलना में अधिक नमी ले जाती हैं, जो सर्दियों में उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में अधिक वर्षा और तूफान का संकेत देती हैं। सर्द सर्दियों का एक और कारण लगातार दूसरे वर्ष “ला नीना” घटना का फिर से उभरना है। इसे संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (एनओएए) द्वारा ‘डबल डिप’ के रूप में जाना गया है।

La Niña क्या है?

ला नीना का मतलब स्पेनिश में द लिटिल गर्ल है। इसे कभी-कभी एल विएजो, अल नीनो विरोधी, या बस “एक ठंडी घटना” भी कहा जाता है।
◆ ला नीना की घटनाएं पूर्व-मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत (east-central equatorial pacific)क्षेत्र में औसत से कम समुद्री सतह के तापमान की अवधि के बारे में बताती है।
◆ला नीना घटना तब देखी जाती है जब पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में पानी का तापमान सामान्य से ज़्यादा ठंडा हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र पर एक मजबूत दबाव बनता है।
◆ला नीना, अल नीनो ठंडी हवा की तुलना में भारत के एक बड़े हिस्से में फैलती है।
◆’ला नीना वर्ष’ में, दक्षिण-पूर्व एशिया में ग्रीष्म मानसून से जुड़ी वर्षा सामान्य से अधिक हो जाती है, विशेषकर उत्तर-पश्चिम भारत और बांग्लादेश में।
◆यह आम तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था, जो कृषि और उद्योग के लिए मानसून पर निर्भर रहता है उस के लिए फायदेमंद होती है।
◆यह आमतौर पर भारत में सामान्य से अधिक ठंड लाता है।

वर्तमान ला नीना घटना की अगले वसंत (फरवरी 2022) तक जारी रहने की भविष्यवाणी की गई है और यह पूर्वोत्तर मानसून के मौसम (जो 26 अक्टूबर को शुरू हुआ) के साथ-साथ western disturbance के साथ मेल खा सकती है।
हालांकि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग अपनी सर्दियों की भविष्यवाणियों के साथ सामने नहीं आया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ला लीना और पश्चिमी विक्षोभ एक साथ आने से इस साल सर्दियों को बहुत ठंडा बनाने वाला है। इसके अलावा अगले साल यह भी माना जा रहा है कि भारत को अगले साल खराब मानसून के साथ गर्म और शुष्क गर्मी का सामना करना पढ़ सकता है।

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